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चुनाव के दौर में


आम आदमी फिर से खुश है चुनाव के दौर में;
भीग गया है वो वादों की बारिश के बौछार में !


आरक्षण और जात पात की राजनीति है माहिर है सब ;
तरसते रहे जाओगे ;कब हुए हैं वादे पूरे, जो होंग अब !!


लैपटॉप और मुफ्त बिजली के बजे है फिर से बिगुल ;
इतिहास गवाह है की कभी नहीं खिले है रेगिस्तान में फुल !!!


सोने वाले , जाग जा रे कही तेरे अपने न तुझसे बिछड जाए,
तेरे इस बेख्याली से कही तेरा सपनों का शहर न उजड जाए !!!!

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