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मैं भारत की बेटी हूँ





बिक रही हूँ किसी बाजार में , टूट रही हूँ किसी के अत्याचार में ,

निर्भया गुडिया बन छप रही हूँ , रोज किसी अखबार में |



कभी सती औए कभी देहज के नाम मुझे लोगोंने जलाया है ,

महाभारत और रामायण होने की जड़ भी मुझे बताया  है ||



अपने अपनों और सपनों के आँगन छोड कर नया घर बनाती हूँ,

सब त्यागकर भी मैं कुलक्षणी कुलटा के नामो से नवाजी जाती हूँ |||



कभी देवी, कभी डायन और कभी पारवती और सीता बनाया

मैंने भी बेटी बहू बहन माँ बन हर रिश्ते को है निभाया ||||



हर घडी जीना है मुश्किल , हर पल मौत की शया पर लेटी हूँ

हर मुश्किल से लड़ती डटकर में , मैं भारत की बेटी हूँ !!!!!





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The Straight Hair Experiment

बाल सीधे करने के लिए लाखों तरीके लोगों ने सुझाये , टेढ़े मेढे उलटे पुलटे , करके देखे हमने सारे   उपाए | मेहँदी में मिलाया दही, अंडों का भी सर पे लगाया घोल , बालों का हो गया सत्यानाश , सब तरीको की खुली पोल || माँ ने घिसा बादाम का तेल, बीवी ने सर पे इस्त्री फिराई , टूटते बिखरते मुरझाते मेरे बालों पे, जाने कैसी शामत आई ||| सब रास्ते अपनाए हमने ,तब जाके अपने यह है जाना , बालों को सीधा और मजबूत करने, सनसिल्क ही अपनाना ||||

यादें ......(Memories)

तेरे जाने से यारा जिंदगी है चरमराई , सब पा लिया , सब हो लिया , पर ऐसे तु रूठी , फिर   ना आयी ! तेरी यादे मीठी , तेरी यादें नमकीन, तेरी यादें करे ग़मगीन ,जाने से तेरे मायूसी है छाई पर ऐसे तु रूठी , फिर   ना आयी ! तेरे जाने से यारा जिंदगी है चरमराई , सब खों दिया , बहुत रो दिया , पर ऐसे तु रूठी , फिर   ना आयी ! तेरी यादो के सहारे , कितने पल है गुजारे , सब जीत लिया , तेरे प्यार से हारे , तेरे आने की उम्मीद खुशियाँ है लायी , पर ऐसे तु रूठी , फिर   ना आयी ! तेरे जाने से यारा जिंदगी है चरमराई , तुझे ही सब कहा , तुझे ही रब कहा , पर ऐसे तु रूठी , फिर   ना आयी !

वो बचपन बहुत प्यारा था

ना Increment की फिकर, ना escalation का डर, ना ईमेलों पे सवाल , ना सवालों से बवाल , ना appraisal के लिए नाइट , ना promotion के लिए फाइट , ना थी laptop की तड़क-भड़क, ना थी वहाँ चापलूसी की सड़क, सच्चा मासूम प्यार तब बहुत सारा था वो बचपन बहुत ही प्यारा था !!!!! काम के Frustration का असर मुझमें भी आया है, बे-वजह हस्ते खेलते बच्चो को धमकाया है, ३० तारीख के इंतज़ार में पूरा महीना बिताया है , लोन ले लेके सपनों का आँगन बनाया है माँ के पराठे को छोडकर Pizza को अपनाया है , घर को धर्मशाला ,ऑफिस को घर बनाया है , तब रोने के लिए कंधो का सहारा था , वो बचपन बहुत ही प्यारा था !!!!!