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                  ||||||| जिंदगी की कहानी ||||||         

सुलझाओगे जितनी जिंदगी को उतना उलझ तुम जाओगे
हर बात के लिए कोसोगे उसको तो कैसे जी तुम पाओगे |

नमकीन मीठा शरबत का प्याला समझके इसे पी लो ,
जब तक है जिंदगी खुशी खुशी इसके रंग में रंगके जी लो ||

क्यों दबाते है दिल में गम अच्छी नहीं यह बेज़ुबानी है ,
हर मौसम का तु लुत्फ़ उठा यह तो जिंदगानी है |||

क्यों खोता है हौसला तु  , क्यों है हार से घबराना ,
गमों की बारिश में ही तो छुपा है खुशियों का खजाना ||||

कायरता है आत्महत्या ;  यह नासमझी पागलपण का नमूना है
कभी किसी परिंदे या जानवर को यह करते हुए सुना है |||||


                                                       
                                              






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The Straight Hair Experiment

बाल सीधे करने के लिए लाखों तरीके लोगों ने सुझाये , टेढ़े मेढे उलटे पुलटे , करके देखे हमने सारे   उपाए | मेहँदी में मिलाया दही, अंडों का भी सर पे लगाया घोल , बालों का हो गया सत्यानाश , सब तरीको की खुली पोल || माँ ने घिसा बादाम का तेल, बीवी ने सर पे इस्त्री फिराई , टूटते बिखरते मुरझाते मेरे बालों पे, जाने कैसी शामत आई ||| सब रास्ते अपनाए हमने ,तब जाके अपने यह है जाना , बालों को सीधा और मजबूत करने, सनसिल्क ही अपनाना ||||

मैं भारत की बेटी हूँ

बिक रही हूँ किसी बाजार में , टूट रही हूँ किसी के अत्याचार में , निर्भया गुडिया बन छप रही हूँ , रोज किसी अखबार में | कभी सती औए कभी देहज के नाम मुझे लोगोंने जलाया है , महाभारत और रामायण होने की जड़ भी मुझे बताया   है || अपने अपनों और सपनों के आँगन छोड कर नया घर बनाती हूँ, सब त्यागकर भी मैं कुलक्षणी कुलटा के नामो से नवाजी जाती हूँ ||| कभी देवी, कभी डायन और कभी पारवती और सीता बनाया मैंने भी बेटी बहू बहन माँ बन हर रिश्ते को है निभाया |||| हर घडी जीना है मुश्किल , हर पल मौत की शया पर लेटी हूँ हर मुश्किल से लड़ती डटकर में , मैं भारत की बेटी हूँ !!!!!

वो बचपन बहुत प्यारा था

ना Increment की फिकर, ना escalation का डर, ना ईमेलों पे सवाल , ना सवालों से बवाल , ना appraisal के लिए नाइट , ना promotion के लिए फाइट , ना थी laptop की तड़क-भड़क, ना थी वहाँ चापलूसी की सड़क, सच्चा मासूम प्यार तब बहुत सारा था वो बचपन बहुत ही प्यारा था !!!!! काम के Frustration का असर मुझमें भी आया है, बे-वजह हस्ते खेलते बच्चो को धमकाया है, ३० तारीख के इंतज़ार में पूरा महीना बिताया है , लोन ले लेके सपनों का आँगन बनाया है माँ के पराठे को छोडकर Pizza को अपनाया है , घर को धर्मशाला ,ऑफिस को घर बनाया है , तब रोने के लिए कंधो का सहारा था , वो बचपन बहुत ही प्यारा था !!!!!