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Delhi Gang Rape

तुमने दरिंदगी को मर्दानगी का नाम तो दे दिया
हरकतों से अपनी इंसानियत को शर्मसार कर दिया |

नाखूनों से जो ज़ख्म तुने, जो रूह पर छोडे है ,
अपनी हैवानियत से तुने , कितनी माँओं के दिल तोड़े है ||

अभी तो जीवित है पर मरेगी हर दिन, जब तक वो जिन्दा होगी,
तुम्हारी करतूतों और नामर्दी से आज भारत माँ भी शर्मिंदा होगी |||

ए मौत के सौदागर तुझे सजा जो भी मिले वो कम होगी ,
तुझ दरिंदे के मौत पर ही, खुशी से हमारी आँखें नम होगी ||||

Comments

  1. good poem
    its time for do some...

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    Replies
    1. please join this page for volunteering for a cause and change with our next step.. https://www.facebook.com/pages/Volunteering-for-a-cause/859486830807236?ref=ts&fref=ts

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